"भारत के इतिहास में कुछ शब्द ऐसे हैं, जो केवल पढ़े या बोले नहीं जाते, बल्कि महसूस कि किए जाते हैं। वे शब्द समय की सीमा पार करके पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं। ‘वन्दे मातरम्’ ऐसे ही शब्दों में से एक है। यह केवल एक गीत की शुरुआत नहीं थी, बल्कि भारत की सोई हुई राष्ट्रीय चेतना को जगाने वाली आवाज थी। इसने भारतीयों को यह बताया कि देश केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीवन देने वाली मातृभूमि है।"